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जी ए वी पब्लिक स्कूल में नन्हे बच्चो की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित

  • अंकित वालिया (कांगड़ा)

जीएवी पब्लिक स्कूल कांगड़ा में नन्हे कलाकार विराजमान हुए। मौका था नर्सरी -केजी फैंसी ड्रेस कंपीटीशन का । कोई राधा कोई मोहन बनकर ध्यान आकर्षित कर रहा था तो कोई फैंसी ड्रेस के जरिए अपने सपनों को हवा देता नजर आया।

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पहली बार नेता बने नन्हे बच्चे मंच पर दिखे जबकि फौजी बने बच्चों ने देश भक्ति का जज्वा दिखाया। अभिभावकों का उत्साह देखते ही बनता था। अंत में नर्सरी में वृक्ष बन कर पर्यावरण का संदेश दे रहे बच्चे शिवांश को प्रथम,किसान बने मोहक को द्वितीय ,भारत माता बनी समृद्धि को तृतीय व झांसी की रानी अनन्या को सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया। केजी में मिस वर्ल्ड धानी को पहला, चंबा की प्यारी गुड़िया रिदम को दूसरा वट्स एप आलिया को तीसरे व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ललित वालिया को सांत्वना पुरस्कार से अलंकृत किया गया। प्रधानाचार्य सुनीलकांत चड्ढा ने विजेताओं को पुरस्कृत किया व अभिभावकों का स्कूल में आने पर स्वागत किया । वहीं प्रधानाचार्य ने बच्चों के अभिभावकों व अध्यापकों को इस प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए बधाई दी।

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राष्ट्रीय सीनियर कार्फबॉल विजेता खिलाड़ी ज्वालाजी में सम्मानित

-राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल लाना एतिहासिक जीत
-खिलाड़ियों की सुविधा में नहीं रखी जाएगी कोई कमी- राकेश प्रजापति
-भोपाल में हरियाणा को हराकर हिमाचल ने गोल्डन गोल से जीती है प्रतियोगिता

  • ज्वालामुखी (कांगड़ा)

31वीं सीनियर राष्ट्रीय कोर्फबॉल प्रतियोगिता में विजेती रही हिमाचल प्रदेश की टीम के खिलाड़ियों के लिए प्रदेश कोर्फबॉल संघ द्वारा आज ज्वालाजी में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता उपायुक्त, कांगड़ा एवं कोर्फबॉल संध के प्रदेशाध्यक्ष राकेश प्रजापति ने की।

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इस अवसर पर उपायुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि खिलाड़ियों के अच्छे खेल प्रदर्शन एवं कड़ी मेहनत की बदौलत ही हिमाचल प्रदेश की टीम विजेता बनी है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अपने खेल का अच्छा प्रदर्शन करते रहे तथा संघ द्वारा खिलाड़ियों की सुविधा में कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी आने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार रहें। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि पढ़ाई और खेलकूद के अलावा भविष्य के चयन के बारे में भी सोचें।

 के महासचिव बी.आर.सुमन ने मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा हिमाचल प्रदेश में कोर्फबॉल बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भोपाल में आयोजित 31वीं सीनियर राष्ट्रीय कोर्फबॉल प्रतियोगिता में 23 राज्यों की टीमों में हिमाचल प्रदेश की टीम का शानदार प्रदर्शन रहा है।

इस अवसर पर उपायुक्त ने कोच देवदत्त प्रेमी, मैनेजर पवन रांगड़ा, कप्तान विशाल शर्मा, आदर्श ठाकुर, सुनील कुमार, रवि, अभिषेक कौंडल, अवनीश, कपिल, साजन, सुशील, आरती, तमन्ना, इंदूबाला, नेहा, प्रिया, पूजा, अनमोल, बृज, वनीता को सम्मानित किया।

कार्यक्रम में एसडीएम ज्वालाजी अंकुश शर्मा, मंदिर अधिकारी विशन दास शर्मा, संघ के उपायध्यक्ष महिन्द्र पाल ठाकुर, कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय रेफरी विनोद कुमार, प्रेस सचिव पवन रांगड़ा, सचिव देवदत प्रेमी, हमीरपुर महासचिव प्रवीण शर्मा, बिलासपुर से बालकृष्ण, कांगड़ा से निर्मल धीमान, संदीप कुमार, संतोष कुमारी व अन्य उपस्थित थे।

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लीजिए जी, येलो कुर्ते में है योग गुरु रणजीत भारत

अंकित वालिया (कांगड़ा)

धर्मशाला के शीला चौक में त्रिगर्त दिव्य योग केंद्र व वर्ल्ड योग अकादमी का शुभारंभ त्रिगर्त योग संस्था के सदस्य डॉ मनोहर लाल के द्वारा दिए गए काम्प्लेक्स में किया गया। जिसका शुभारम्भ सनातन संस्कृति की प्रक्रिया पूजा पद्दति से किया गया।

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योग गुरु रणजीत त्रिगर्त भारत ने बताया कि योग को स्थायी रूप से जन जन तक पहुंचाने के लिए योग को केंद्रों के माध्यम से गोद लेने की आवश्यकता है।

योग केंद्र खोलने का मुख्य उद्देश्य नशामुक्त, रोजगार युक्त भारत है और लोगों को घर द्वार में प्राचीन साइंस योग व प्राकृतिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करवाना है। त्रिगर्त योग केंद्र शीला में आधुनिक युग की बीमारिया जैसे थायरॉइड, मधुमेह, मोटापा, उच्चरक्तचाप, माइग्रेन, साइनस, सर्वाइकल, घुटनों का दर्द इत्यादि की योग थेरेपी से चिक्तिसा कर निजात दिलायी जायेगी। वेलनेस के लिए भी योगआसन व प्राणायाम ध्यान योग आदि से तनाव मुक्त संगठित समाज का निर्माण किया जायेगा।

बच्चों व युवाओं को योग से जोड़कर शारीरिक, मानसिक , आत्मिक रूप व स्थायी रूप से संस्कारमय व विकासशील बनाया जायेगा । साथ में योग के आधुनिक अभ्यासों जैसे आर्टिस्टिक, रिदमिक व सोलो संगीतमय योग से जोड़कर विश्व स्तरीय मंच प्रदान किया जायेगा। जैसे हाल ही में नगर परिषद मैदान काँगड़ा में विश्वकीर्तिमान बने थे 14 जून को उसमे काँगड़ा जिला के गांव केलड नगरोटा बगंवा के राहुल ने दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाये थे।

इसके साथ ही योग गुरु रणजीत त्रिगर्त भारत के माध्यम से हिमाचल के नाम 42 वर्ल्ड रिकॉर्ड हो चुके हैं। यंहा पर पंचकर्मा व षट्कर्म शुद्धि क्रियाएँ भी करवाई जाएँगी जिससे शरीर के टॉक्सिन्स भी प्राकृतिक रूप से शरीर से बाहर निकाले जायेंगे।इस अवसर पर शिक्षा विभाग के सचिव श्री धर्मेश रमोत्रा व खण्ड चिक्तिसा अधिकारी काँगड़ा डॉ संजय भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में पधारे।

इस अवसर पर योग के साथ गौ शाला विषय पर भी चर्चा हुई, जिसमे मुख्य अतिथि ने गौ सेवा के अपने द्वारा किये कार्यों का भी उल्लेख किया और योग गुरु रणजीत के सुझाव पर गुरुकुल व गौशाला एक साथ चलायी जाये इस पर एकजुट हो कर साथ देने का वादा किया और योग सिखने के साथ सबको योग करने का आह्वान करते हुए त्रिगर्त योग केंद्र की सदस्यता भी ग्रहण की। धर्मेश रमोत्रा ने कहा कि योग जिसे आज के दस वर्ष बाद दुनिया ढूंढती हुए अपनायेगी जब सब रास्ते ,सब पद्धतियां बन्द हो जाएंगी उस समय योग ही काम आएगा तो क्यों न हम आज ही अपने स्वस्थ भविष्य के लिए योग को अपनाए।

इस् अवसर विशेष पर अतिथियो में ई. अजयशर्मा, रोशन लाल नरूला, कृष्ण, कर्नल वाई. एस. राना,कर्नल करतार सिंह, सुदेश कुमारी, इंदिरा गोस्वामी, दुर्गेश नन्दनी, उत्तम धीमान, मदन भरद्वाज, सुरेश भरद्वाज, विक्रम सिंह, राज राणा अध्यक्ष धौलाधार स्कूल श्यामनगर, विश्वचक्षु,राजेश,रेणुबाला, बबिता,अवंतिका व योग गुरु रणजीत के माता मुकेश रानी, बच्चे व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला सम्पन्न, मुख्यमंत्री ने लिया शोभा यात्रा में भाग

  • अंकित वालिया (कांगड़ा)

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने चंबा के सप्ताह भर चलने वाले प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का धूमधाम, भव्यता और धार्मिक उत्साह के साथ समापन किया। उन्होंने अखण्ड चंडी महल से मंजरी गार्डन तक चलने वाले समापन समारोह के जुलूस का नेतृत्व करते हुए मिंजर (गोल्डन टैसेल) को रावी नदी में पारंपरिक ढंग से विसर्जित किया।

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समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने देवताओं के रंगारंग मिंजर जुलूस का नेतृत्व किया। उन्होंने जलूस में शामिल नृत्य मंडली, पारंपरिक परिधानों से सुसज्जित स्थानीय लोगों, पर्यटकों, पुलिस और होमगार्ड बैंड व पारंपरिक ढोल नगाड़ां के साथ अखंड चंडी महल से मार्च किया और रावी नदी के तट पर मंजरी गार्डन पहुंचे। उन्होंने मिंजर को रावी नदी में विसर्जित किया।

जुलूस में मुख्यमंत्री के साथ शहरी विकास मंत्री सरवीन चौधरी, प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज, विधायक पवन नैय्यर, विक्रम जरयाल, जिया लाल कपूर और जवाहर ठाकुर, भाजपा जिलाध्यक्ष डी.एस. ठाकुर, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष डॉ. राजीव भारद्वाज और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक चौगान में कुश्ती मुकाबलों का आनन्द लिया और विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने इससे पूर्व चंबा शहर के लिए 30.56 करोड़ रुपये की लागत के शिलान्यास और उद्घाटन किए, जिनमें राजकीय डिग्री कॉलेज चंबा में 8.71 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पीजी ब्लॉक का शिलान्यास, लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चंबा शहर की ओबरी, मायका-बाग और सुल्तानपुर सीवरेज योजना का शिलान्यास तथा 4.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुलिस लाइन परिसर चंबा में प्रशासनिक ब्लॉक का उद्घाटन किया।

इस परिसर को अठारह महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया और 3.60 करोड़ रुपये की राशि खर्च करके चंबा शहर की पुरानी ग्रेविटी पाइपलाइन की रिपलेसमेंट का उद्घाटन शामिल हैं।

इस योजना से चंबा शहर की लगभग 25,000 की आबादी लाभान्वित होगी और प्रति दिन 31 लाख लीटर पानी उपलब्ध किया जाएगा।

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ऊना में विद्यार्थी परिषद का सेल्फी विद कैंपस अभियान

  • अंकित वालिया (कांगड़ा)

इन दिनों विद्यार्थी परिषद का प्रदेश के कॉलेजों में चल रहा सेल्फी विद कैंपस अभियान हर कॉलेज में अपनी पहचान बना रहा है। इस कड़ी में कल ऊना में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई द्वारा सेल्फी विद कैंपस अभियान के तहत PMKY nursing Institute के कार्यकर्ताओं व छात्राओं के साथ सेल्फी ली गई।

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विद्यार्थी परिषद की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीपा गुड़ियां द्वारा इस अभियान के बारे में छात्राओं को जानकारी दी गई और बताया कि विद्यार्थी परिषद के सदस्य इस अभियान के तहत प्रत्येक शिक्षण संस्थान में जाएंगे और छात्रों को एबीवीपी के बारे में जानकारी देंगे। इस मौके पर नैनसी , रजनी, तनू आदि अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

उधर भटोली महाविद्यालय के इकाई अध्यक्ष शुभम और इकाई मंत्री सक्षम द्वारा भटोली महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली गई व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बारे में छात्र-छात्राओं को विस्तारपूर्वक बताया गया।

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उन्होने छात्रों को बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्व की सबसे बड़ी छात्रों द्वारा बनाई गई स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन है। जो छात्र हितो के लिए सबसे आगे हैं।

ऊना महाविद्यालय के इकाई उपाध्यक्ष विनोद इकाई सचिव मुकुल द्वारा ऊना महाविद्यालय के कैंपस में छात्र छात्राओं के साथ सेल्फी ली गई।

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छात्र छात्राओं को बताया गया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्र हित, समाज हित व राष्ट्रहित के लिए क्या करती है

विद्यार्थी परिषद का यह अभियान 1 से 10 अगस्त तक प्रदेश के हर महाविद्यालय में चलेगा। विभिन्न महाविद्यालयो में विद्यार्थी परिषद के छात्रों द्वारा इस अभियान के अन्तर्गत छात्रों को एकत्र कर सेल्फी ली जा चुकी हैं। जबकि बचे हुए महाविद्यालयों में भी जल्द ही इस अभियान के अन्तर्गत सेल्फी ली जाएगी।

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने चलाया सेल्फी विद कैंपस अभियान !!

  • अंकित वालिया (कांगड़ा)

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने पूरे देश में सेल्फी विद केंपस यूनिट अभियान की शुरुआत 1 अगस्त गुरुवार से की है। विद्यार्थी परिषद् का यह अभियान 10 अगस्त तक चलेगा।

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ए.बी.वी.पी. ने पिछले वर्ष भी सेल्फी विद केंपस का एक अभियान शुरू किया था जिसमें उन्होंने देश के निजी व सरकारी कॉलेज तथा उच्च माध्यमिक पाठशाला में जाकर वहां पर छात्रों के साथ कैंपस में सेल्फी ली थी।

इस वर्ष भी सेल्फी विद केंपस यूनिट के तहत देश व प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों पर जाकर वहां पर छात्रों की आवाज बुलंद करने के लिए विद्यार्थी परिषद् की इकाइयां बनाई गई है।

इन इकाइयों के द्वारा देश में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों के साथ एक सेल्फी भी ली जाएगी। यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है इस अभियान की शुरुआत हिमाचल प्रदेश से शुरू हुई है।

कांगड़ा जिला के कांगड़ा, धर्मशाला, रीजनल सेंटर धर्मशाला, मटौर , तकीपुर, शाहपुर, लंज, नगरोटा आदि महाविद्यालयों में इकाइयों के साथ सेल्फी लेकर इस अभियान की शुरुआत की गई ।

विद्यार्थी परिषद ऐसे ही रचनात्मक कार्यक्रम लेकर देश व प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को साथ जोड़ने व उनकी आवाज बुलंद करने का प्रयास करता आया है।

इस अभियान के तहत डिग्री कॉलेज, होटल मैनेजमेंट संस्थान, पॉलिटेक्निक कॉलेज ,आदि शिक्षण संस्थान आते है।

जिला कांगड़ा के एबीवीपी मीडिया प्रभारी अंशुल ने बताया कि इस अभियान को लेकर कॉलेज में विद्यार्थियों को अखिल भारतीय परिषद के साथ जोड़ना व छात्रों की आवाज बुलंद करने के लिए इकाइयां बनाई गई हैं।

यह अभियान 1 अगस्त से 10 अगस्त तक चलेगा।

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रोटरी क्लब ने नगर परिषद मैदान कांगड़ा में रोपे 50 अशोका के पौधे।

अंकित वालिया (कांगड़ा)

नगर परिषद कांगड़ा मैदान में बास्केटबॉल कोर्ट के किनारे रोटरी क्लब कांगड़ा ने कांगड़ा नगर परिषद व वन विभाग के सहयोग से 50 अशोका के पौधे रोपे। जिसमे रोटरी क्लब अध्यक्ष नवनीत शर्मा, वह रोटरी क्लब सचिव सुनील डोगरा की अगुवाई में पोधारोपन किया गया। इन सभी पोधो की लंबाई 4फुट है।

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इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अशोक शर्मा जी ने सर्वप्रथम पोधारोपन कर इस मुहिम को शुरू किया। नगर परिषद पार्षद अशोक शर्मा ने क्लब के कार्यो को सराहा और भविस्य में भी क्लब को समाजसेवा के लिए योगदान देने की बात कही। फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर ने कहा कि वे हर साल पौधरोपण में भाग लेते हैं।

क्लब प्रधान नवनीत शर्मा ने बताया कि क्लब द्वारा पौधरोपण में औषधीय व छाया प्रदान करने वाले पौधे लगाए गए। वह पौधों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। । इस अवसर पर क्लब के सदस्य सुभाष भसीन, प्रशांत भसीन, वेद प्रकाश शर्मा, विनोद अग्रवाल, अमन गुलेरिया, डॉक्टर वी. के. महाजन, ज्योति कोहली, पुनीत महाजन, अश्वनी गुलेरिया, राजीव धवन, संदीप अग्रवाल, इंद्रदेव सचदेवा, आदर्श, सोनू, राकेश मौजूद रहे।

वहीं फॉरेस्ट गार्ड की ओर से संजीव विट्टल, तनु कुमारी व अन्य मौजूद रहे।

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चंबा- यहां, मुस्लिम परिवार की बनाई मिंजर मंदिर में चढ़ाने पर शुरू होता है मिंजर मेला

अंकित वालिया

-चंबा, यूं तो देवभूमि हिमाचल में कई मेले और त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन चंबा जिले का मिंजर मेला सबसे अलग है। हिंदू और मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक शिवभूमि चंबा का अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में प्रसिद्ध है। चंबा के मिर्जा परिवार के सदस्य आज भी हिंदू भाइयों के लिए मिंजर बनाते हैं। रेशम के धागे में मोती पिरोकर बनाई इस मिंजर के लक्ष्मीनारायण मंदिर में चढ़ाने के बाद ही मिंजर महोत्सव यानी मिंजर मेला शुरू होता है। लगभग 400 साल से यह परंपरा निभाई जा रही है। चंबा शहर के राजा साहिल वर्मन द्वारा उनकी बेटी राजकुमारी चंपावती के कहने पर रावी नदी के किनारे बसाया गया था। इसीलिए इस शहर का नाम चंबा रखा गया था।

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यह मेला श्रावण मास के दूसरे रविवार को शुरू होकर सप्ताह भर चलता है। *इस बार यह मेला 28 जुलाई से 4 अगस्त तक चलेगा।* दो समुदायों में एकजुटता की मिसाल इस मेले की खासियत यह भी है कि सावन की रिमझिम फुहारों के बीच भगवान श्री लक्ष्मीनारायण के मंदिर में मिंजर अर्पित की जाती है। इसके बाद अखंड चंडी महल में भगवान रघुवीर को मिंजर चढ़ाई जाती है। एतिहासिक चंबा चौगान (मैदान) में मिंजर का ध्वज चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही मिंजर मेला विधिवत रूप से आरंभ होता है।

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

शाहजहां के शासनकाल के दौरान सूर्यवंशी राजा पृथ्वी सिंह, रघुवीर जी को चंबा लाए थे। शाहजहां ने मिर्जा साफी बेग को रघुवीर जी के साथ राजदूत के रूप में भेजा था। मिर्जा साहब जरी गोटे के काम में माहिर थे।

चंबा पहुंचने पर उन्होंने जरी की मिंजर बनाकर रघुवीर जी, लक्ष्मीनारायण भगवान और राजा पृथ्वी सिंह को भेंट की थी। तबसे मिंजर मेले का आगाज मिर्जा साहब के परिवार का वरिष्ठ सदस्य रघुवीर जी को मिंजर भेंट करके करता है। इससे चंबा के साथ-साथ संपूर्ण भारत की धर्म निरपेक्षता की झलक मिलती है। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार आज भी मिर्जा परिवार के सदस्यों द्वारा मिंजर तैयार कर भगवान रघुवीर को अर्पित की जाती है।

स्वरूप बदला पर मिंजर नहीं

आजकल मेले का स्वरूप बदला है। लेकिन हिंदू देवताओं पर अर्पित होने वाली मिंजर को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा तैयार करने की परंपरा कायम है। पीढ़ी दर पीढ़ी चंबा में मिर्जा परिवार के सदस्य इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। मक्की की मिंजर से प्रेरित चंबा जिला के इस एतिहासिक उत्सव में मुस्लिम समुदाय के लोग रेशम के धागे में मोती पिरोकर मिंजर तैयार करते हैं। सदियों से चले आ रहे इस मेले को अब प्रशासन के सहयोग से आयोजित किया जाता है।

क्यों मिला मिंजर का नाम

स्थानीय लोग मक्की और धान की बालियों को मिंजर कहते हैं। इस मेले का आरंभ रघुवीर जी और लक्ष्मीनारायण भगवान को धान और मक्की की मिंजर या मंजरी, मिंजर को लाल कपड़े पर गोटे से जड़कर, एक रुपया, नारियल और ऋतुफल भेंट किए जाते हैं। इस मिंजर को एक सप्ताह बाद रावी नदी में प्रवाहित किया जाता है।

कब आया बदलाव

आजादी के बाद मिंजर विसर्जन के दौरान सिर्फ रघुनाथ जी की पालकी ही मिंजर यात्रा के साथ चलती थी। बाद में प्रशासन ने स्थानीय देवी-देवताओं को भी इस यात्रा में शामिल करने की इजाजत दी। मिंजर की शोभायात्रा मेले के अंतिम दिन पूरे राजशाही अंदाज में निकाली जाती है और मंजरी गार्डन में मिंजर को प्रवाहित किया जाता है।

मिंजर मेले की परंपराएं

मिंजर मेले में पहले दिन भगवान रघुवीर जी की शोभायात्रा निकलती है। इसे चंबा के एतिहासिक चौगान तक लाया जाता है जहां से मेले का आगाज होता है। भगवान रघुवीर जी के साथ आसपास के 200 से अधिक देवी-देवता भी चौगान में पहुंचते हैं। मिर्जा परिवार सबसे पहले मिंजर भेंट करता है। उस समय घर-घर में ऋतुगीत और कुंजड़ी-मल्हार गाए जाते थे। अब स्थानीय कलाकार मेले में इस परंपरा को निभाते हैं। मिंजर मेले की मुख्य शोभायात्रा राजमहल अखंड चंडी से चौगान से होते हुए रावी नदी के किनारे तक पहुंचती है। यहां मिंजर के साथ लाल कपड़े में नारियल लपेट कर, एक रुपया और फल-मिठाई नदी में प्रवाहित की जाती है।

भैंसे की बलि दी जाती थी

1943 तक मिंजर मेले में भैंसे की बलि देने की प्रथा थी। इसके अनुसार जीवित भैंसे को नदी में बहा दिया जाता था। यह आने वाले साल में राज्य के भविष्य को दर्शाता था। अगर पानी का बहाव भैंसे को साथ ले जाता था और वह डूबता नहीं था तो उसे अच्छा माना जाता था। यह माना जाता था कि बलि स्वीकार हुई। अगर भैंसा बच जाता और नदी के दूसरे किनारे चला जाए तो उसे भी अच्छा माना जाता था कि दुर्भाग्य दूसरी ओर चला गया है। अगर भैंसा उसी तरफ वापस आ जाता था तो उसे बुरा माना जाता था। अब भैंसे की जगह सांकेतिक रूप से नारियल की बलि दी जाती है। विभाजन के बाद पाकिस्तान गए लोग भी रावी नदी के किनारे मिंजर प्रवाहित करते हैं और कुंजड़ी -मल्हार गाते हैं। 1948 से रघुवीर जी रथयात्रा की अगुवाई करते हैं।

यह भी रोचक

चंबा जिला के बुद्धिजीवियों की मानें तो 19वीं सदी में एक भैंसे ने रावी नदी को पार कर लिया और करीब 17 साल तक यह भैंसा चंबा के राजमहल में शाही मेहमान के रूप में रहा। राजा ने उसकी सेवा के लिए सेवादारों की व्यवस्था भी कर रखी थी। उसने लगातार 17 साल तक रावी को पार किया और बाद में राजमहल में उसकी मौत हो गई थी।

मेले में विशेष

मिंजर मेला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो गया है। यहां अब स्थानीय ही नहीं बल्कि अन्य जिलों और राज्यों से भी लोग मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं। मेले में हाथ से बना सामान काफी बिकता है। चंबा रूमाल, चंबा चप्पल यहां की विशेषता है। इसके अलावा और भी वस्तुओं का व्यापार भी होता है।

यह भी थी प्रथा

पद्मश्री विजय शर्मा की मानें तो 1946 तक चंबा में झोटे (भैंसे) को रावी नदी में उतारा जाता था। मान्यता थी कि यदि भैंसा रावी के पार पहुंच जाए तो चंबा नगर के सभी दुख खत्म हो जाएंगे। लोग दूरदराज के गांवों से मिंजर में सिर्फ अंतिम दिन शोभायात्रा को देखने के लिए आते थे। 1947 में इस प्रथा को खत्म कर दिया गया। अब सिर्फ मिंजर का ही विसर्जन किया जाता है।


जिला चंबा के ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का शुभारम्भ 28 जुलाई को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष श्री हंस राज द्वारा विधिवत रूप से ध्वज फहरा कर किया गया


29 जुलाई को नीतीश राजपूत, राजीव थापा, तारिक़ मलिक, रूमैल सिंह, योगेश मुकुल, सुनील राणा अपने सुरो की महफ़िल से लोगो का मनोरंजन करेंगे

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Watch Pics-विद्यार्थी परिषद् की कांगड़ा इकाई ने किया पौधारोपण

अंकित वालिया (कांगड़ा)

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की कांगड़ा इकाई द्वारा दौलतपुर में पिछले कल पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने पूरे प्रदेश में एक लाख पौधे लगाये। इसी कड़ी में कांगड़ा में विद्यार्थी परिषद् द्वारा 2500 पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में वन मण्डल अधिकारी धर्मशाला डा. संजीव शर्मा, कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में श्रीमति नीतु धमीर, मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थी परिषद् के प्रांत छात्र शक्ति प्रमुख चन्दन आनन्द एवं वशिष्ट अतिथि के रूप में श्री विनोद अग्रवाल उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम के मुख्यातिथि डा. संजीव शर्मा ने उपस्थित लोगों को वनों के महत्व बताते हुए, सबको पेड़ लगाने और उनके संरक्षण करने को कहा। साथ ही उन्होंने पेड़ लगाने अथवा पौधारोपन की विधि भी बताई। कार्यक्रम में विद्यार्थी परिषद् के प्रांत छात्रशक्ति प्रमुख चन्दन आनन्द ने उपस्थित विद्यार्थी और लोगों को विद्यार्थी परिषद् के इतिहास के बारे में बताया कि किस तरह विद्यार्थी परिषद् पिछले 70 साल से राष्ट्र के पुनर्निर्माण का कार्य कर रही है और आज तेजी से होते जलवायु परिवर्तन और पेड़ों के कटान से विधार्थी परिषद् प्रदेश भर में आम विद्यार्थीओं और लोगों को साथ लेकर पौधारोपन का यह महाअभियान एक आंदोलन के रूप में ले रही है।

इस कार्यक्रम में कांगड़ा के विभिन्न शिक्षा संस्थानों से छात्रों और आम लोगों ने भाग लिया। डिग्री कालेज मटौर के 400 विद्यार्थी, डिग्री महाविद्यालय तक्कीपुर के 300 विद्यार्थी, मटौर स्थित कौशल विकास केन्द्र के 20 विद्यार्थी और शिक्षक, हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय छात्र आवास कांगड़ा से 15 विद्यार्थी एवं शोधार्थी, दौलतपुर ग्राम पंचायत के सभी सदस्य, गांव से 50 लोग, व्यवसायी, स्थानीय लोग, जागोरी संस्था के कार्यकर्ता, वन विभाग के लोग एवं विभिन्न संस्थाओं समेत विद्यार्थी परिषद् के सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पोधारोपन कर आने वाले समय के लिए प्रकृति को हरा भरा बनाने के लिए बोहत ही सराहनीय प्रयास किया है।

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“सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं हिमाचल के कलाकार”-रश्मि ठाकुर

एक मुकालात-खास बात

  • विनोद चड्ढा

-शिमला की एंकर रश्मि ठाकुर ने एंकरिंग में मनवाया अपना लोहा
-संघर्षों के बाद एंकरिंग की दुनिया में कमाया नाम

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शिमला की रश्मि ठाकुर से ‘एक मुलाकात खास बात’ में News81 के बिलासपुर रिपोर्टर विनोद चड्ढा से खास बातचीत की और अपने जीवन के कुछ पहलू साँझा किये। रश्मि ठाकुर ने बताया कि उन्होंने बचपन में स्कूल के दौरान से स्टेज पर अपनी आवाज़ का जलवा बिखेरना शुरू कर दिया था। स्कूल में ऐसा कोई प्रोग्राम नही होता था जिसमे उन्हें स्टेज का काम ना मिला हो उसके बाद रश्मि ठाकुर ने पीछे मुड़ कर नही देखा और आज हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में ऐसी कोई जगह नहीं बची है जहाँ रश्मि ठाकुर ने जिला, राज्यस्तरीय और अंतर्राष्ट्रीय मेलों और लाइव प्रोग्राम में अपनी एंकरिंग का लोहा ना मनवाया हो। आज हिमाचल के साथ साथ उन्हें बाहर के राज्यो में भी एंकरिंग के लिए जाना जाता है।

   

रश्मि ठाकुर को एंकरिंग की दुनिया का बेताज बादशाह माना जाता है। उन्होंने बताया कि वो मूल रूप से जिला शिमला के सुन्नी के गांव भरगण की निवासी हैं। बचपन से ही मुश्किलों का सामना करने वाली रश्मि ठाकुर ने बड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। इनके पिता सेना में कार्यरत थे इसी कारण उनकी शिक्षा भी देश के विभिन्न जगहों पर हुई। जब रश्मि करीब दसवीं में पढ़ रही थीं तो उनके माता-पिता का देहांत हो गया। ऐसे में पढ़ाई के साथ-साथ इन को नौकरी भी करनी पड़ी।

जिंदगी में अलग जज्बा रखने वाली रश्मि ठाकुर ने ग्रेजुएशन की और बचपन से ही एनसीसी से भी जुड़ी रहीं। एनसीसी में इन्होंने खेलों के साथ-साथ एंकरिंग की और अपना झुकाव एंकरिंग की तरफ रखा। हालांकि उस समय उनको यह पता नहीं था कि भविष्य में यही उनका व्यवसाय बन जाएगा। जिंदगी के विभिन्न उतार चढ़ावों के बीच 2011 में इन्होंने एंकरिंग के क्षेत्र में हाथ आजमाना शुरू किया।

रश्मि ने बताया कि शिमला में समर फेस्टिवल के माध्यम से इन्होंने प्रोफेशनल एंकरिंग के कैरियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने प्रदेश के कई जगहों पर सफल कार्यक्रम दिए। देश के बाहर भी इन्होंने कई सफल कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें प्रमुख तौर पर पंजाब, चंडीगढ़ जयपुर में भी शो किए ।

रश्मि ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के कलाकार पिछले कई सालों से सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं । उन्होंने कहा कि जो भी आर्टिस्ट अपनी महेनत और अपने बलबूते पर आगे बढ़ने की कोशिश करता है उसे हमेशा दबाने की कोशिश की जाती है. पहले अपनी महेनत और कोशिश से आर्टिस्ट हिमाचल के हर कोने में आसानी से पहुंच कर अपना जलबा लोगो को दिखाता था मगर अब टैलंट आर्टिस्टों के पास इतनी पहुंच नही होती की वे आसानी से किसी भी प्रोग्राम में अपना टैलेंट जनता को दिखा सकें। उन्होंने कहा कि राजनीती के आगे टैलेंट भी कोई मायने नही रखता उसका टैलेंट भी तब जीरो हो जाता है जब कोई व्यक्ति राजनीती में पहुंच के कारण हर प्रोग्राम में पहुंच कर कार्यक्रमों को अंजाम दे रहे हैं अब कई जगह तो प्रशासनिक अधिकारी भी राजनीतिक विडंबनाओं के शिकार हो चुके हैं । अब ऐसे आर्टिस्ट राजनीती की पहुंच से आगे बढ़ रहे है जिनको इस क्षेत्र का सही प्रयोग तक करना नही आता है। मगर फिर भी वे राजनीती के पहुंच के कारण उस कार्य को अंजाम दे देते हैं.

मगर दुःख की बात तो यह है कि पिछले 2 सालों से हिमाचल के आर्टिस्ट के साथ सरकार कुछ ज्यादा ही सौतेला व्यवहार करती आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोगो पिछले 10 सालों से हिमाचल और देश-विदेश तक में अपना लोहा मनवा चुके हैं आज सरकार उनका अपमान कर रही है और जिला और राज्यस्तरीय प्रोग्रामो में अपने चहेतों को फायदा पहुंचा रहे है चाहे उन्हें उस क्षेत्र का अनुभव हो या न, बस अपना फायदा लेने के लिए हिमाचल के कलाकारों का अपमान कर रहे है जो एक बहुत दुःख की बात है ।

एंकरिंग में अपना लोहा मनवाने के लिए उन्हें सरकार की तरफ से कोई भी सम्मान नही मिला लेकिन कई संस्थाओं और मालिटियार फोर्स के माध्यम से जिला और नेशनल पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है, जो पूरे हिमाचल और शिमला के लिए गर्व की बात है.

उन्होंने बताया कि कुछ कारपोरेट के साथ भी इन्होंने कार्यक्रम दिए। उन्होंने अपने फ्लोर और दर्शकों का विशेष धन्यवाद किया।

रश्मि ठाकुर ने युवा पीढ़ी से आव्हान किया है कि वे नशे से दूर रहें और अपने जीवन को इस मौत के समंदर से दूर रखें और अपने करियर को सही दिशा की तरफ ले जायें ताकि उनका जीवन भी सुनहरा बन सके।

रश्मि ठाकुर ने लोगो से अपील की है कि वे बेटा और बेटी को एक समान समझें, क्योंकि आज की बेटी बेटों से हर क्षेत्र में आगे हैं, इसलिए बेटियों का सदा समान करो और उनके जीवन को खुशहाल करो। उन्होंने कहा कि अगर नारी होगी तो आगे वंश चलेगा, नही तो आज बेटियां कम होने से हमारा वंश खतरे में पहुच चुका है. हमें बेटियों की कोख में हत्या बंद करनी होगी तभी एक समृद्ध और खुशहाल समाज का निर्माण होगा.

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